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*रक्षा-बंधन के सुअवसर पर अवश्य पढ़िए, ये लघुकथा--"नापाक रिश्ता"*

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*रक्षा-बंधन के सुअवसर पर अवश्य पढ़िए, ये लघुकथा--"नापाक रिश्ता"* ------------------------------------------------------------------------------------ *बहन ने धर्मभाई के कलाई पर राखी बाँधी, चन्दन की टीका लगाई, आरती उतारी और महिमा-मंडित, प्रेम-पुष्पित 'कर' से मिठाई खिलाई ।                                  न परिचय, न पाती...। अनाथ को बहन ने धर्मभाई बनाया था , अपनी छत्रच्छाया में उन्हें भरकोशिश पढ़ाया-लिखाया और 'चार्टर्ड - अकाउंटेंट' जैसे 'जॉब' दिलवायी------- आमदनी की अम्बार सजी । प्रथम अवकाश में धर्मभाई सावन पूर्णिमा से एक दिन पूर्व बहन के पास आया था ।                      ××××××××××××××××××××××× थी तो पूर्णिमा की रात...... और रात में.................... कमरे में अँधेरे होने का फायदा उठाया -------- "म.......मैं........मैं......